Wednesday, 26 April 2017

बना रहे बनारस


https://www.youtube.com/watch?v=2GogD_bURX0


बनारस यूं तो कई चीजों के लिए प्रसिद्ध है। चाहे वह उसका पान हो, मंदिर हो या घाट। पिछले दिनों बनारस में कुछ दिन बिताने का मौका मिला। जिस कार्य के लिए गया था उसका परिणाम तो सकारात्मक नहीं आया लेकिन इसी बहाने बनारस घूमने का मौका मिल गया। एक बात और जब आप घूमने जाए तो सिर्फ घूमिए उस दौरान कार्य के लिए शूट करने लगे तो फिर आप पूरे आनंद के साथ घूम नहीं पाएंगे। कुछ ऐसा हुआ मेरे साथ। चूंकि बहुत कम समय के लिए गया था तो घूमना और शूट दोनों करना था। शायद इसी कारण मैं पूरे आनंद के साथ नहीं घूम पाया। पर इस बात की खुशी भी है अपने दर्शकों के लिए मैं कुछ वहां से कुछ ले आने में सफल हो गया। 
बहरहाल वहां पहुंचने के दिन की शाम को मैं और मेरे मित्र बनारस के घाट घूमने निकले। हम लोग सीधे तुलसी घाट पहुंचे। वहां से अस्सी घाट ज्यादा दूर नहीं हैं। तुलसी घाट के बारे में कहा जाता है कि यहां गोस्वामी तुलसी दास से रामचरित मानस के कुछ अंशों की रचना की थी। यह केवल तुलसी दास घाट के बारे में नहीं है। हर घाट के बनने की अपनी कहानी है। उससे जुड़े रिति-रिवाज हैं। घाटों को इस प्रकार बनाया गया है कि आप सारे घाटों को आसानी से एक साथ घूम सकते हैं। सभी एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। 
घाटों पर गंगा में स्नान करते लोग, पूजा की सामग्री बेचते लोग, पूजा से इतर सामग्री बेचते लोग, पर्यटक और हम जैसे वेल्हे लोग आसानी से मिल जाते हैं। यहां ऋद्धालुओं की एक अलग जमात देखने को मिलती है। चूंकि बनारस महादेव की नगरी है तो उसका प्रसाद माने जाने वाले गांजे का सुट्टा लगाते हुए लोग घाटों पर आसानी से मिल जाएंगे। इसमें विदेशी भी शामिल होते हैं। मुझे हमेशा लगता है कि गांजा पीना सिगरेट पीने से साइक्लोजिकली ज्यादा आसान है। क्योंकि सिगरेट पर इसके हानिकारक होने की घोषणा की हुई होती है। जिससे आप कहीं न कहीं मानसिक रूप परेशान रहते हैं जबकि गांजे को महादेव का प्रसाद मानने के कारण वह मानसिक परेशानी कम हो जाती है।   
आज कल घाट काफी साफ-सुथरे हो गए हैं। बनारस के घाट कई फिल्मों में भी आपको देखने को मिल जाएंगे। जैसे मसान, काशी का अस्सी और बेंजामिल बॉटम, द रिबाउंड है। इनमें से कई फिल्मों की पृष्ठभूमि ही घाट की थी तो कुछ में एक-आध दृश्यों दिखाए गए थे। मणिकर्णिका घाट के बारे में कहा जाता है कि यहां कि अग्नि कभी शांत नहीं होती। यहां लगातार अंतिम संस्कार होते रहते हैं। और माना जाता है कि यहां हुआ अंतिम संस्कार आपको सीधे स्वर्ग ले जाता है। शायद यही कारण है कि लोग यहां मरने की उम्मीद लेकर आते हैं।

1 comment:

  1. World's oldest living city # Banaras # Varanasi .
    Good travelogue

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