Thursday, 23 February 2017

मुझे आजमाती है तेरी कमी ...


आज कॉलेज जाने के लिए घर से निकली तो और दिन के मुकाबले बहुत जाम दिखा . तो कार को हाईवे के रास्ते मोड़ दिया,जो लम्बा तो काफी है पर साफ़ है.मौसम भी अच्छा सा हो गया है .रास्ता भी फ्लाईओवर से गुजर रहा था ..अमूमन मैं कार में अपना काम करती चलती हूँ .तभी FM पर एक आने वाली फिल्म का गाना बज उठा –बहुत दिनों के बाद एक मीनिंग-फुल गाना सुना जिसकी एक लाइन ने मेरे बाकी सारे कामों को रोक दिया और मन उसी लाइन पर अटक गया ...
‘मुझे आजमाती है तेरी कमी ...मेरी हर कमी को है तू लाजिमी’
कितने सारे अर्थ दे गया ... मन की कितनी सारी परतें खोल गया यह वाक्य ..सच में जीवन में कितनी आजमाइश होती है..जीवन की स्थूल परीक्षाओं में तो पास होना एक बात है ...लेकिन असली आजमाइश तब होती है जब किसी की कमी से ओवरकम करना होता है..जब पूरी दुनिया के होने के मायने नहीं होते हैं बल्कि किसी एक का न होना अधिक चुनौती देता है...अच्छा भला जीवन होता है ,न जाने कहाँ से ,कौन से ग्रह से कोई अजनबी आता है .फिर बस आ ही जाता है ...
वैसे इस आजमाइश का अपना मज़ा है ..एक पुल फैक्टर होता है इसमें ...लाइफ में जब-तब पीछे झांक लेने से ताकत मिलती है .. शुक्र है कि अपने पास भी कहानी है,कुछ किस्से हैं ....वह अलग बात है कि आजमाइश भी है और बराबर है ...वैसे यह भी मेरी जिज्ञासा का विषय है कि क्या होता होगा जो लोग इस आजमाइश में नहीं पड़ते होंगे ..माने भले से दिखने वाले लोगों की तरह एक शांत सा ,दुनियावी अर्थों में सफल सा जीवन जीते होंगे..
इब्ने बतूता ने यात्रा के बारे में कहा था कि It leaves you speechless then turns you into a Story Teller...इश्क भी इंसान को किस्सागोई विशेषग्य बना देता है. . खैर ....शायद और भी सोचती ,पर गाना भी खत्म हो गया ..और कॉलेज भी आ गया Iऔर अपन चल दिए ब्रेकिंग न्यूज़ पढ़ाने ...
मेरा आसमा ढूंढे तेरी ज़मीं ....जमीं न सही तो आसमां में आ मिल ..

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